• CHS Building काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के 
    श्रीविश्वनाथमन्दिर की स्थापना 
    बुद्धवार 11 मार्च 1931 तद्् दिनांक 
    चैत्र कृष्ण अष्टमी को तपोनिधि 
    कृष्णाश्रम स्वामी जी महाराज के
     पवित्र कर कमलो से विश्वविद्यालय 
    के संस्थापक पं0 मदन मोहन मालवीय जी
     के उपस्थिति में हुआ। 
  • 17 फरवरी 1958 सोमवार फाल्गुन कृष्ण 
    चर्तुदशी, महाशिवरात्रि के पवित्र 
    अवसर पर पण्डित विश्वनाथ शास्त्रीजी 
    के नेतृत्व में प्रतिष्ठा के लिए 
    निर्धारित सभी वैदिक कर्म पूरी रात
     विधिवत् हुए और विश्वविद्यालय में
     विश्वनाथ मन्दिर में विश्वनाथ भगवान् 
    प्रतिष्ठित हो गये। मन्दिर का निर्माण 
    कार्य 1966 के अन्त में पूर्ण हुआ।

  • यह सफेद संगमर का बना यह मन्दिर भारत
     वर्ष का सबसे ऊंचा शिव मन्दिर है, जिसकी 
    ऊचाई 76 मीटर (250 फीट) है। इस मन्दिर का 
    निर्माण बिरला परिवार एवं अन्य दान 
    दाताओं के सहयोग से किया गया है। चूँकि 
    इस मन्दिर के निर्माण में बिरला परिवार 
    का आर्थिक योगदान सर्वाधिक है। अतः 
    जनसाधारण इस मन्दिर को बिरला मन्दिर भी करते हैं।
  • मन्दिर के दिन प्रतिदिन के कार्यक्रम भोर के 4.00 बजे स्नान एवं श्रृंगार। 
    प्रातः 4.45 बजे मंगला आरती। 
    पूर्वाहण 10.30 बजे भोग। 
    पूर्वाह्ण 11.5 बजे शयन आरती।
    मध्यान्ह् 12.00 बजे शयन।
  • ... अपराह्ण 1.00 बजे जागरण आरती।
    रात्रि 7.30 बजे स्नान एवं श्रृंगार।
    रात्रि 7.45 बजे विशेष आरती।
  • ... रात्रि 8.45 बजे शयन आरती।
    रात्रि 9.00 बजे कपाट बन्द। 
    विशेषः- प्रति सोमवार प्रातः 7.00 बजे अभिषेक, 8.00 बजे आरती एवं विशेष भोग।

श्रीविश्वनाथमन्दिर में विशेष पर्व एवं त्योहार पर आयोजित विशेष कार्यक्रम


1.मन्दिर का स्थापना दिवस: चैत्र कृष्ण अष्टमी को श्रीविश्वनाथमन्दिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रातः 8.00 बजे माननीय कुलपति महोदय के कर-कमलों द्वारा रुद्राभिषेक सम्पन्न होता है।
2.बासन्तिक नवरात्र महोत्सव: बारन्तिक नवरात्र महोत्सव के अन्तर्गत मन्दिर में अधोलिखित कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
(क) कलश स्थापना: चैत्र शुक्ल प्रतिपद् को श्रीविश्वनाथमन्दिर में स्थित महामाया मन्दिर में प्रातः 8.00 बजे माननीय कुलपति महोदय के कर-कमलों द्वारा कलश स्थापना आयोजित किया जाता है।
(ख) श्री दुर्गाशप्तशती पाठ: प्रतिपद् से नवमी तक प्रातः 7.00 बजे से 8.30 बजे तक मन्दिर के पुजारीगणों द्वारा श्रीविश्वनाथमन्दिर में स्थित महामाया मन्दिर में श्री दुर्गाशप्तशती पाठ किया जाता है।
(ग) पूर्णाहुति: चैत्र शुक्ल नवमी को प्रातः 10.00 बजे दुर्गासप्तसती पाठ की पूर्णाहुति का कार्यक्रम सम्पन्न होता है। 
3.श्रावण महोत्सव: श्रावण मास के शुभारम्भ से श्रीकृष्णजन्माष्टमी तक श्रावण महोत्सव मनाया जाता है। इसके अन्तर्गत अधोलिखित कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
(क) प्रवचन: श्रावण मास में मन्दिर में प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
(ख) धार्मिक लोकगीत प्रतियोगिता: श्रावण मास में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गैर शिक्षण कर्मचारियों की धार्मिक लोक गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। 
(ग) श्री कृष्णजन्माष्टमी के अवसर पर सायंकाल श्रीकृष्णजी की झांकी एवं भजन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। रात्रि 12.00 बजे श्रीकृष्णजन्म के उपरान्त मन्दिर के मानित व्यवस्थापक महोदय के कर-कमलो द्वारा आरती की जाती है। 
4.शारदीय नवरात्र महोत्सव: बारन्तिक नवरात्र महोत्सव के अन्तर्गत मन्दिर में अधोलिखित कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
(क) कलश स्थापना: आश्विन शुक्ल प्रतिपद् को श्रीविश्वनाथमन्दिर में स्थित महामाया मन्दिर में प्रातः 8.00 बजे माननीय कुलपति महोदय के कर-कमलों द्वारा कलश स्थापना आयोजित किया जाता है।
(ख) श्री दुर्गाशप्तशती पाठ: प्रतिपद् से नवमी तक प्रातः 7.00 बजे से 8.30 बजे तक मन्दिर के पुजारीगणों द्वारा श्रीविश्वनाथमन्दिर में स्थित महामाया मन्दिर में श्री दुर्गाशप्तशती पाठ किया जाता है।
(ग) पूर्णाहुति: आश्विन शुक्ल नवमी को प्रातः 10.00 बजे दुर्गासप्तसती पाठ की पूर्णाहुति का कार्यक्रम सम्पन्न होता है।
5.हनुमत् जयन्ती, दीपावली एवं अन्नकूट महोत्सव: 
(क) हनुमत् जयन्ती: हनुमत् जयन्ती के अन्तर्गत कार्तिक अमावस्या को प्रातः 6.00 बजे माननीय मानित व्यवस्थापक महोदय के कर कमलों द्वारा श्री हनुमान जी की आरती की जाती है। आरती के उपरान्त हनुमान चालीसा एवं सुन्दरकाण्ड का पाठ दर्शनार्थियों द्वारा किया जाता है। 
(ख) दीपावली: कार्तिक अमावस्या को सायंकाल गोधूलि बेला में भगवान् गणेश-लक्ष्मी का पूजन, दीपदान एवं प्रसाद वितरण किया जाता है। इस अवसर पर मन्दिर का दीपक, मोमबत्ती एवं विद्युत झालरों के माध्यम से भव्य सजावट किया जाता है।
(ग) अन्नकूट: दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसके अन्तर्गत अपराह्ण 1.00 बजे बाबा को भव्य छप्पन भोग लगाने के उपरान्त प्रसाद वितरण किया जाता है। 
6.मालवीय जयन्ती: पौष कृष्ण अष्टमी को मालवीय जयन्ती के अवसर पर प्रातःकाल 8.00 बजे माननीय कुलपति महोदय के कर-कमलों द्वारा बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक आयोजित किया जाता है। 
7.श्री महाशिवरात्रि: श्री महाशिवरत्रि के अवसर पर मन्दिर भोर के 4.00 बजे से रात्रि 12.00 बजे तक खुला रहता है। इसके अन्तर्गत अधोलिखित कार्यक्रम आयोजित होते हैं। 
(क) फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी को प्रातः 8.00 बजे कलश स्थापना माननीय कुलपति महोदय के कर-कमलों द्वारा।
(ख) शिवपुराण पाठ: फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी से श्रीमहाशिवरात्रि तक। 
(ख) शिवपुराण की पूर्णाहुति: श्रीमहाशिवरात्रि को प्रातः 10.00 बजे होती है।