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चिकित्सा विज्ञान संस्थान

वर्तमान काल में चिकित्सा विज्ञान संस्थान में तीन संकाय चिकित्सा विज्ञान, दन्त चिकित्सा विज्ञान एवं आयुर्वेद संकाय सन्निहित है, जो इसकी सतत् यात्रा का प्रतिफल है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में सन् १९२२ में यह एक विभाग के रूप में और सन् १९२७ में आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ जो बाद में सन् १९६० ई० में चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के रूप में परिणत हुआ। तत्पश्चात् विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा १९७१ में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के रूप में उच्चीकृत हुआ। सन् १९७८ में संस्थान में दो संकाय विज्ञान एवं आयुर्वेद अस्तित्व में आया। संस्थान उत्तरोत्तर उल्लेखनीय प्रगति करते हुए वर्तमान स्वरूप तक पहुँचा।

सन् १९६० में एम.बी.बी.एस. स्नातक पाठ्यक्रम के साथ चिकित्सा विज्ञान, संकाय के रूप में अस्तित्व में आया। आधुनिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सन् १९६३ में प्रारम्भ हुआ था तथा वर्तमान काल में १३४ सीटों के साथ एम.डी./ एम.एस. पाठ्यक्रम ३३ विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में संचालित है। सन् १९७६ में उच्च विशेषज्ञता वाले जैसे डी.एम./एम.सी.एच. पाठ्यक्रम की शुरूआत हुई और अब चिकित्सा विज्ञान के अन्तर्गत २५५ बेड हैं। २० सीटों के साथ डी.एम./एम.सी.एच. पाठ्यक्रम ११ उच्च विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में चल रहे हैं। वृक्करोग, रेडियोथिरेपी एवं पैथालाजी विभाग में तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाये जा रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान संकाय में विभिन्न विशेष दक्षतावाले प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे- पी.जी.डी.एम.सी.एच., आई.एम.एन.सी.आई., आई.डी.एस.पी., पी.डी.सी.सी. (नि:संज्ञा) भी चलाये जा रहे हैं।

आयुर्वेद संकाय विश्वविद्यालय का सबसे पुराना संकाय है, यह १९२७ में अस्तित्व में आया। वर्तमान समय में स्नातकोत्तर, स्नातक, स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम आयुर्वेद संकाय द्वारा चलाया जा रहा है। यह अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आयुर्वेद संकाय देश का मात्र अकेला संकाय है जो १५ विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में स्नातकोत्तर उपाधि उपलब्ध करा रहा है। द्रव्यगुण विभाग के अन्तर्गत १० एकड़ भूमि से आच्छादित एक औषधीय पौधों का बगीचा जिसमें २०० औषधीय पौधों की प्रजातियां विद्यमान है, सुशोभित है। रसशास्त्र विभाग में एक हरबेरियम एवं व्रूड ड्रग म्यूजियम व्यवस्थित है जिसमें ४५० प्रजातियाँ विद्यमान है। पंचकर्म विभाग विभिन्न रोगों के निदान की विधि उपलब्ध कराता है। वृहद संख्या में गुर्दा रोग से ग्रसित शल्य तन्त्र विभाग के अन्तर्गत संचालित क्षारसूत्र इकाई द्वारा लाभान्वित होते हैं।

एम.बी.बी.एस. के छात्रों की पढ़ाई के लिए सन् १९६२ में दन्तरोग विज्ञान शल्य विभाग की एक इकाई के रूप में प्रारम्भ हुआ। अक्टूबर सन् १९७१ में दन्तरोग विज्ञान एक विभाग के रूप में अस्तित्व में आया और दो छात्रों के प्रवेश के साथ सन् १९७९ में एम.डी.एस. (आपरेटिव डेन्टल सर्जरी) पाठ्यक्रम शुरू हुआ। एक छात्र प्रतिवर्ष की दर से सन् १९८८ में एम.डी.एस. (प्रोस्थोडोन्टिक्स) पाठ्यक्रम शुरू किया गया। सितम्बर २००५ में दन्तरोग विज्ञान विभाग दन्तरोग विज्ञान संकाय में उच्चीकृत हुआ। सन् २००८ में २५ छात्रों के प्रवेश के साथ बी.डी.एस. पाठ्यक्रम की शुरूआत हुई। एक छात्र के प्रवेश के साथ एम.डी.एस. (आर्थोडान्टिक्स) पाठ्यक्रम की भी शुरूआत हुई। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के साथ सम्बद्ध सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के पास आयुर्वेद के १८६ बेड को मिलाकर कुल १२०० बेड हैं। संस्थान के साथ कर्मचारी स्वास्थ्य केन्द्र एवं छात्र स्वास्थ्य संकुल भी सम्बद्ध हैं। सर सुन्दरलाल चिकित्सालय पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पड़ोसी राज्यों की जनता को आधुनिक स्तर की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराता है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान एवं सर सुन्दरलाल चिकित्सालय को उच्चीकृत करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार ने चुना है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अन्तर्गत ट्रामा सेन्टर के साथ एक अस्पताल एवं ४ विशेष दक्षता वाले विभाग के निर्माण के लिए सहायता उपलब्ध कराया है। अस्पताल के पास कम्पोनेन्ट सीपरेशन सुविधा के साथ एक आधुनिक रक्तकोष भी है। नेशनल एड्स कण्ट्रोल आर्गेनाइगेशन (नाको) नई दिल्ली द्वारा इसे `ए' ग्रेड मिला है। नाको द्वारा अस्पताल रक्तकोष को एक मोबाइल ब्लड बैंक वैन उपलब्ध कराया गया है, जिसकी कीमत एक करोड़ सैंतीस लाख रूपये है, रोगी सेवा के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाये विद्यार्थियों को अत्याधुनिक शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध सुविधाओं को उपलब्ध कराता है। विभिन्न विभागों में शिक्षण एवं शोध कार्यक्रमों के लिए उच्च तकनीक से युक्त प्रयोगशाला की सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्थान का ग्रन्थालय रविवार एवं अन्य अवकाश के दिनों में भी खुला रहता है। ग्रन्थालय में इण्टरनेट एवं फोटोकापी सुविधाएं हैं। छात्रावास में रहने वाले छात्रों को छात्रावास में कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट की सुविधाएँ प्राप्त है। संस्थान से सम्बद्ध विशेष इकाई के रूप में एक जनसंख्या, शिक्षा, विस्तार एवं शोध केन्द्र है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से वित्तपोषित है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (का़ हि़ वि़ वि़ )