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सन्देश


बाला लखेन्द्र
कार्यक्रम समन्वयक

भारत में छात्रों को राष्ट्रीय सेवा के कार्य में शामिल करने का विचार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समय का है। उन्होंने छात्रों के लिए बार-बार जोर दिया वह यह थी कि उन्हें अपने समक्ष सदैव अपनी सामाजिक जिम्मेदारी रखनी चाहिए छात्रों का प्रथम कर्तव्य उनके अध्ययन की अवधि को केवल बौद्धिक ज्ञान तक ही सीमित न रखकर स्वयं को ऐसे व्यक्तियों की सेवा में समर्पित करना है जिन्होंने राष्ट्र की वस्तुओं और सेवाओं के साथ हमारे देश को आवश्यक चीजें प्रदान की है जो कि समाज के लिए अति आवश्यक है। स्वतंत्रता पश्चात् डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में स्वैच्छिक आधार पर शैक्षिक संस्थाओं में राष्ट्रीय सेवा आरंभ करने की सिफारिश की। 1959 में शिक्षा मंत्री के सम्मेलन के समक्ष योजना का एक मसौदा रखा गया। इस दिशा में सटीक सुझाव देने के लिए 28 अगस्त, 1959 को डॉ. सी.डी. देशमुख की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय सेवा समिति की नियुक्ति की गई। 1960 में भारत सरकार की पहलता पर प्रो. के.जी. सैय्यदेन ने विश्व के कई देशों में क्रियान्वित छात्रों द्वारा राष्ट्रीय सेवा का अध्ययन किया और कई सिफारिशों के साथ सरकार को ‘युवाओं के लिए राष्ट्रीय सेवा’ शीर्षक के तहत अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. डी.एस. कोठारी (1964-66) की अध्यक्षता में शिक्षा आयोग ने यह सिफारिश दी की शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्रों को सामाजिक सेवा के किसी रूप से जोड़ा जाना चाहिए। इस पर अप्रैल, 1967 में राज्य शिक्षा मंत्री द्वारा उनके सम्मेलन के दौरान विचार किया गया की कि राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नामक एक नया कार्यक्रम प्रदान किया जा सकता है। सितम्बर, 1969 में कुलपतियों के सम्मेलन में इस सिफारिश का स्वागत किया गया। मई 1969 में शिक्षा मंत्रालय तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संचालित विश्वविदृयालयों और उच्च शिक्षा संस्थाओं के छात्र प्रतिनिधियों के सम्मेलन में घोषणा की गई कि राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय एकता के लिए सशक्त माध्यम हो सकती है। 24 सितम्बर, 1969 को तत्कालनी शिक्षामंत्री डॉ. वी. के. आर.वी. राव ने सभी राज्यों को शामिल करते हुए 37 विश्वविद्यालयों में एनएसएस कार्यक्रम आरंभ किया । आज राष्ट्रीय सेवा योजना विश्व भर में राष्ट्रीय विकास, सेवा, शांति, राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करने वाले छात्र समूह की सबसे बड़े रचनात्मक संगठन के रूप में हमारे सामने है ।
राष्ट्रीय सेवा योजना ने अपने गौरवशाली 50 वर्षों में युवा जागरुकता, राष्ट्र निर्माण और विश्व शांति के लिए अनेकानेक कार्यक्रमों के साथ अपनी पहचान बनाई है। ऐसे महान संगठन में आपका स्वागत है ।
आइए , हम सब मिलकर एक समृद्ध राष्ट्र , एक विकसित राष्ट्र , एक जागृत राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें ।
जय हिंद,
जय भारत ।

 

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